साहित्य के विशाल संसार में काव्य का स्थान उच्च माना गया है। काव्य वह माध्यम है जिसके द्वारा मानव हृदय की सूक्ष्म भावनाएँ, अनुभूतियाँ और विचार सौंदर्यपूर्ण भाषा में अभिव्यक्त होते हैं। यह केवल शब्दों का संयोग नहीं, बल्कि हृदय की संवेदना और कल्पना की सजीव अभिव्यक्ति है। काव्य मनुष्य के हृदय को स्पर्श करता है, उसे आनन्द, प्रेरणा और जीवन-दर्शन प्रदान करता है। काव्य की पूर्णता उसके लक्षण, हेतु, प्रयोजन और प्रकार के समुचित ज्ञान से होती है। काव्य लक्षण यह बताते हैं कि किसी रचना को काव्य कहलाने योग्य बनाने वाले तत्व कौन-से हैं। काव्य हेतु उस प्रेरणा को व्यक्त करता है जो कवि को रचना के लिए प्रेरित करती है। काव्य प्रयोजन काव्य का उद्देश्य बताता है — अर्थात् कवि क्यों रचना करता है और वह समाज को क्या देना चाहता है। वहीं काव्य प्रकार काव्य की विविध विधाओं का परिचय कराता है, जिनसे साहित्य में विविधता और विस्तार आता है। इस प्रकार, काव्य केवल भावनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन के सत्य, सौंदर्य और नैतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति है। काव्य मनुष्य को संवेदनशील, सृजनशील और विचारशील बनाता है। अतः काव्य के ल...
छत्तीसगढ़ की महान कला एवं संस्कृति कला , संस्कृति की वाहिका है जिस प्रकार भारत की कला में भिन्नता है उसी प्रकार छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति भी बहुआयामी है वनों से आच्छादित व आदिवासी अधिकता के कारण यहां की कला में वनों , प्रकृति , प्राचीन और परम्परा का विशेष स्थान व महत्व है। छत्तीसगढ़ की कला में हमें विभिन्न प्रकार के लोक नृत्य , जातियां , लोक कला , मेले , विभिन्न भाषा , शिल्प और विशेष व्यंजन देखने को मिलते हैं। प्रदेश में यहां के आभूषणों , वस्त्रों का विशेष स्थान है जो यहां की संस्कृति को और प्रभावशाली व समृद्ध बनाती हैं सरल जीवन जीते हुए यहां के लोग अपनी परम्परा , रीति रिवाज और मान्यताओं का पालन करते है। समय-समय पर ऋतुओं , तिथि और त्योहार अनुसार विभिन्न उत्सवों और संस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है प्रत्येक गांव, जिले, क्षेत्र की अपनी अलग मान्यताएं, पहचान व धार्मिक महत्व हैं। माना जाता है कि कला का प्राण है रसात्मकता। रस अथवा आनन्द अथवा आस्वाद्य। कला के द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संस्कृति व परम्पराओं का प्रदान होता है छत्तीसगढ़ की कला जहाँ एक ओर त...