Skip to main content

Posts

काव्य लक्षण , काव्य हेतु , काव्य प्रयोजन , काव्य प्रकार

साहित्य के विशाल संसार में काव्य का स्थान उच्च माना गया है। काव्य वह माध्यम है जिसके द्वारा मानव हृदय की सूक्ष्म भावनाएँ, अनुभूतियाँ और विचार सौंदर्यपूर्ण भाषा में अभिव्यक्त होते हैं। यह केवल शब्दों का संयोग नहीं, बल्कि हृदय की संवेदना और कल्पना की सजीव अभिव्यक्ति है। काव्य मनुष्य के हृदय को स्पर्श करता है, उसे आनन्द, प्रेरणा और जीवन-दर्शन प्रदान करता है। काव्य की पूर्णता उसके लक्षण, हेतु, प्रयोजन और प्रकार के समुचित ज्ञान से होती है। काव्य लक्षण यह बताते हैं कि किसी रचना को काव्य कहलाने योग्य बनाने वाले तत्व कौन-से हैं। काव्य हेतु उस प्रेरणा को व्यक्त करता है जो कवि को रचना के लिए प्रेरित करती है। काव्य प्रयोजन काव्य का उद्देश्य बताता है — अर्थात् कवि क्यों रचना करता है और वह समाज को क्या देना चाहता है। वहीं काव्य प्रकार काव्य की विविध विधाओं का परिचय कराता है, जिनसे साहित्य में विविधता और विस्तार आता है। इस प्रकार, काव्य केवल भावनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन के सत्य, सौंदर्य और नैतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति है। काव्य मनुष्य को संवेदनशील, सृजनशील और विचारशील बनाता है। अतः काव्य के ल...

अनुवाद के प्रकार :- कार्यालयीन , वैज्ञानिक तथा तकनीकी

एक भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में अभिव्यक्त करना ही अनुवाद है। अनुवाद समन्वय की कला है। अनुवाद एक ऐसा विज्ञान है जो विध्वंस या अलगाव को कदापि महत्त्व नहीं देता। यह सबको एक दूसरे से जोड़ने और मिलाने का काम करता है। अनुवाद का महत्व, इसका अस्तित्व अनादि काल से है। जैसे-जैसे मनुष्य विकसित होता गया, वैसे-वैसे अनुवाद भी विकसित होता गया। आज के अति आधुनिक युग में जैसे-जैसे नए-नए आविष्कार हो रहे हैं, नित्य नये परिवर्तन हो रहे हैं वैसे-वैसे अनुवाद क्षेत्र भी विकसित हो रहा है। यदि हम वर्तमान युग को अनुवाद का युग कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि यह आधुनिक युग की परम आवश्यक प्रक्रिया के रूप में उभर कर सामने आया है। भूमंडलीकरण, उदारीकरण बाजारीकरण, उपभोक्तावाद, सूचना और संचार क्रान्ति के युग में जहाँ प्रति क्षण कुछ बदल रहा है, प्रतिक्षण कुछ नया अनुसंधान हो रहा है, जहाँ 'कर लो दुनिया मुट्ठी में' की अवधारणा को सबके द्वारा अपनाया जा रहा है, आत्मसात किया जा रहा है इस प्रति पल परिवर्तित होते समय में अनुवाद की महत्ता और बढ़ती जा रही है, इसकी माँग अधिक बढ़ती जा रही है। ऐसे में आवश्...

हिन्दी के प्रमुख पोर्टल

आज के डिजिटल युग में इंटरनेट सूचना, शिक्षा, मनोरंजन और संचार का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है। जहाँ पहले ज्ञान और जानकारी का मुख्य स्रोत पुस्तकें हुआ करती थीं, वहीं अब वेबसाइटें और पोर्टल्स ने उस स्थान को काफी हद तक ले लिया है। हिन्दी भाषा, जो विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, अब इंटरनेट पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। हिन्दी के प्रमुख पोर्टल न केवल भाषा और साहित्य को समृद्ध बना रहे हैं, बल्कि वे जनसामान्य तक सूचना, समाचार, ज्ञान और मनोरंजन पहुँचाने का भी कार्य कर रहे हैं। हिन्दी के प्रमुख पोर्टल का महत्व हिन्दी के प्रमुख पोर्टल आज के डिजिटल युग में ज्ञान, सूचना और संस्कृति के प्रसार के सबसे सशक्त माध्यम बन गए हैं। इन पोर्टलों का महत्त्व केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि ये समाज, शिक्षा, पत्रकारिता और तकनीकी विकास से भी जुड़ चुके हैं। सबसे पहले, हिन्दी पोर्टल भाषाई सशक्तिकरण का कार्य कर रहे हैं। इंटरनेट पर पहले जहाँ अंग्रेज़ी का प्रभुत्व था, वहीं अब हिन्दी पोर्टलों के माध्यम से करोड़ों हिन्दीभाषी लोग अपनी भाषा में जानकारी प्राप्त कर पा रहे हैं। इससे हिन्...

महादेवी वर्मा का व्यक्तित्व एवं कृतित्व

महादेवी वर्मा (26 मार्च 1907 — 11 सितम्बर 1987) हिन्दी भाषा की कवयित्री थीं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। महादेवी ने स्वतन्त्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी। वे उन कवियों में से एक हैं जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार, रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अन्धकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की। न केवल उनका काव्य बल्कि उनके सामाजसुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे। जन्म - 26 मार्च 1907 जन्म स्थान - फ़र्रुख़ाबाद, संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध  मृत्यु - 11 सितम्बर 1987 (उम्र 80 वर्ष) मृत्यु स्थान - प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत पिता - श्री गोविंद प्रसाद वर्मा  माता - श्रीमती हेमरानी देवी  जीवनसाथी - डॉक्टर स्वरूप नारायण वर्मा पुरस्कार - 1956 : पद्म भूषण 1982 : ज्ञानपीठ पुरस्कार 1988 : पद्म विभूषण जीवनी  महादे...

हिन्दी पत्रकारिता का उदय एवं विकास

हिन्दी पत्रकारिता का उदय एवं विकास हिन्दी पत्रकारिता की कहानी भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है। हिन्दी पत्रकारिता के आदि उन्नायक जातीय चेतना, युगबोध और अपने महत् दायित्व के प्रति पूर्ण सचेत थे। कदाचित् इसलिए विदेशी सरकार की दमन-नीति का उन्हें शिकार होना पड़ा था, उसके नृशंस व्यवहार की यातना झेलनी पड़ी थी। उन्नीसवीं शताब्दी में हिन्दी गद्य-निर्माण की चेष्टा और हिन्दु-प्रचार आन्दोलन अत्यन्त प्रतिकूल परिस्थितियों में भयंकर कठिनाइयों का सामना करते हुए भी कितना तेज और पुष्ट था इसका साक्ष्य ‘भारतमित्र’ (सन् 1878 ई, में) ‘सार सुधानिधि’ (सन् 1879 ई.) और ‘उचित वक्ता’ (सन् 1880 ई.) के जीर्ण पृष्ठों पर मुखर है। भारत में प्रकाशित होने वाला पहला हिंदी भाषा का अखबार, उदंत मार्तंड (द राइजिंग सन), 30 मई 1826 को शुरू हुआ। इस दिन को "हिंदी पत्रकारिता दिवस" के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसने हिंदी भाषा में पत्रकारिता की शुरुआत को चिह्नित किया था। वर्तमान में हिन्दी पत्रकारिता ने अंग्रेजी पत्रकारिता के दबदबे को खत्म कर दिया है। पहले देश-विदेश में अंग्रेजी पत्रकारिता का दबदबा था लेकिन आज हिन्दी ...

नागार्जुन के व्यक्तित्व व कृतित्व का आलोचनात्मक अध्ययन

नागार्जुन के व्यक्तित्व व कृतित्व का आलोचनात्मक अध्ययन नागार्जुन ( 30 जून 1911 - 5 नवम्बर 1998 ) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बाङ्ला में मौलिक रचनाएँ भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बाङ्ला से अनुवाद कार्य भी किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नागार्जुन ने मैथिली में यात्री उपनाम से लिखा तथा यह उपनाम उनके मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र के साथ मिलकर एकमेक हो गया। जीवन परिचय  जन्म: 30 जून 1911, सतलखा गाँव, मधुबनी, बिहार. मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र. उपनाम: यात्री. मृत्यु: 5 नवंबर 1998. शिक्षा: उन्होंने संस्कृत, मैथिली और हिंदी में शिक्षा प्राप्त की. साहित्यिक योगदान: उन्होंने हिंदी, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला में कविताएँ, उपन्यास, कहानी, निबंध, जीवनी, अनुवाद आदि लिखा. प्रमुख रचनाएँ: "भस्मांकुर", "पत्रहीन नग्न गाछ", "रतिनाथ की चाची", "बलचनमा", "वरुण के बेटे". राजनीतिक संबद्धता: वे कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े रहे और ...

Popular posts from this blog